फेक जाति प्रमाण पत्र बनवाने पर 7 साल की सजा और नौकरी रद्द

इंदौर
नौकरियों के आवेदन के साथ ही राज्य एवं केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश एवं छात्रवृत्ति प्राप्त करने के लिए जाति के प्रमाण की आवश्यकता पढ़ती है। पात्रता होने पर नियमानुसार यह दस्तावेज बनवाना हमारा अधिकार है जबकि गलत तरीके से फर्जी दस्तावेज बनवाने पर कानून भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के अंतर्गत अपराध है। यह दस्तावेज अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए जारी होता है। इसके लिए आवेदन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से बनवाया जा सकता है।

सरकारी नौकरी तुरंत रद्द हो जाती है
एडवोकेट महेश लाठी बताते है कि फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाने या उपयोग करने के गंभीर नुकसान हो सकते है। नए कानून भारतीय न्याय संहिता इसमें फर्जी दस्तावेज बनाना के लिए 7 साल तक एवं अर्थ दंड बताया गया है।फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर ली गई सरकारी नौकरी तुरंत रद्द हो जाती है। शिक्षा संस्थानों में दाखिला भी रद्द कर दिया जाता है, जिससे भविष्य खराब हो सकता है। पकड़े जाने पर समाज में विश्वास खो जाता है और व्यक्ति की प्रतिष्ठा गिर जाती है। जाति और समुदाय की छवि खराब होती है।
 
रिश्तों और सामाजिक पहचान पर भी बुरा असर पड़ता है। सरकारी योजनाओं के लाभ की वसूली की जाती है। फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर मिले आरक्षण, छात्रवृत्ति, सरकारी योजना के लाभ वापस लिए जाते हैं। इसका निष्कर्ष यह है कि फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनाना या उपयोग करना कानूनन अपराध है। साथ ही सामाजिक दृष्टि से भी गलत है। इससे व्यक्ति का करियर, सम्मान और भविष्य खतरे में पड़ सकता है। इसलिए सही दस्तावेज के साथ ही प्रमाण पत्र बनवाना चाहिए और यदि कोई गलती हो तो तुरंत सुधार कराना चाहिए।

ये भी पढ़ें :  प्रदूषण की वजह से राजस्थान में पहली बार स्कूल की छुट्टी, पांचवीं कक्षा तक नहीं लगेंगी क्लासेस

इन तीन प्रक्रिया का पालन कर आवेदन
– आपके जाति प्रमाण पत्र सत्र 2000 से पहले जारी हुआ है तो इसे आफ डिजिटल करवाना के लिए आधार, समक्र जन्म तारीख वाली अंक सूची उपलबध करानी होगी। इसके साथ ही एक फोबल्कि यहटो एवं पूर्व प्रमाण पत्र भी बनावाना होगा।

– आवेदक को रक्त संबंध के आधार पर भी जाति का प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। इसके लिए माता-पिता, चाचा, भाई, बहन और दादा का जाति का प्रमाण पत्र देना होगा। इसके साथ अन्य दस्तावेज आधार, समग्र एवं एक फोटो देना होगा।

ये भी पढ़ें :  देश का पहला ‘खेल मास्टर प्लान’ बनाने वाला शहर बना जबलपुर, 2035 तक विकसित पूरे शहर में जुटाएंगे खेल सुविधाएं

– यदि किसी के पास पूर्व जारी प्रमाण पत्र नहीं है और रक्त संबंधी प्रमाण पत्र भी नहीं है। इसके चलते अंकसूची और निवास का प्रमाण पत्र देना होगा। साथ ही समग्र, आधार और फोट भी देना होगा।

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment